Secure Shell (SSH) in Cryptography Explained in Hindi & English | सिक्योर शेल (SSH) क्रिप्टोग्राफी में (Complete Notes for Data Science & Information Security Students)


सिक्योर शेल (SSH) क्रिप्टोग्राफी में (Secure Shell in Cryptography)

परिचय:

Secure Shell (SSH) एक नेटवर्क प्रोटोकॉल है जो असुरक्षित नेटवर्क पर सुरक्षित संचार स्थापित करने के लिए उपयोग किया जाता है। यह उपयोगकर्ता को किसी रिमोट सर्वर या सिस्टम से एन्क्रिप्टेड चैनल के माध्यम से कनेक्ट होने की अनुमति देता है, ताकि कोई तीसरा व्यक्ति संचार को सुन या बदल न सके।

SSH का सबसे आम उपयोग सिस्टम एडमिनिस्ट्रेशन, क्लाउड सर्वर मैनेजमेंट, और फाइल ट्रांसफर के लिए होता है।


SSH की आवश्यकता:

  • Telnet जैसे असुरक्षित प्रोटोकॉल का सुरक्षित विकल्प।
  • Remote Login के दौरान पासवर्ड और डेटा को एन्क्रिप्ट करने के लिए।
  • सर्वर और क्लाइंट के बीच विश्वसनीय और गोपनीय संचार सुनिश्चित करने के लिए।
  • Remote Configuration, File Management और Automation के लिए।

SSH का कार्य सिद्धांत (Working Principle):

SSH Public Key Cryptography पर आधारित होता है और इसके तीन मुख्य घटक होते हैं:

  1. Transport Layer Protocol: Authentication और Encryption प्रदान करता है।
  2. User Authentication Protocol: उपयोगकर्ता की पहचान सत्यापित करता है।
  3. Connection Protocol: विभिन्न सेवाओं (Shell, File Transfer) के लिए चैनल बनाता है।

SSH का कार्यप्रवाह (Working Process):

1️⃣ Connection Establishment:

क्लाइंट सर्वर से TCP पोर्ट 22 पर कनेक्शन स्थापित करता है।

2️⃣ Key Exchange:

सर्वर और क्लाइंट एक-दूसरे की सार्वजनिक कुंजी (Public Key) का आदान-प्रदान करते हैं और Session Key जनरेट करते हैं। यह कुंजी आगे होने वाले सभी संचार को एन्क्रिप्ट करने के लिए उपयोग होती है।

3️⃣ Server Authentication:

क्लाइंट सर्वर के Certificate और Host Key की जांच करता है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि यह असली सर्वर है।

4️⃣ User Authentication:

उपयोगकर्ता पासवर्ड, पब्लिक की या अन्य Authentication Method से लॉगिन करता है।

5️⃣ Secure Communication:

अब डेटा एन्क्रिप्टेड चैनल के माध्यम से ट्रांसफर होता है।


SSH Authentication के प्रकार:

1️⃣ Password-based Authentication:

उपयोगकर्ता को पासवर्ड डालकर लॉगिन करना होता है। यह सरल है लेकिन कमजोर सुरक्षा प्रदान करता है।

2️⃣ Public Key-based Authentication:

यह सबसे सुरक्षित तरीका है। इसमें क्लाइंट की पब्लिक की सर्वर पर रजिस्टर होती है और Private Key केवल क्लाइंट के पास रहती है।

3️⃣ Host-based Authentication:

सर्वर और क्लाइंट दोनों के होस्ट की वैधता के आधार पर लॉगिन अनुमति दी जाती है।


SSH Key Pair Structure:

  • Private Key: क्लाइंट के पास सुरक्षित रखी जाती है।
  • Public Key: सर्वर पर रजिस्टर की जाती है।

Key Algorithms:

  • RSA (Rivest-Shamir-Adleman)
  • DSA (Digital Signature Algorithm)
  • ECDSA (Elliptic Curve DSA)
  • Ed25519 (Modern & Secure)

SSH की प्रमुख विशेषताएँ:

  • Strong Encryption (AES, Blowfish, ChaCha20)
  • Data Integrity (MAC Verification)
  • Compression Support
  • Port Forwarding और Tunneling
  • Public Key Authentication

SSH Commands और Tools:

  • ssh: Remote Login के लिए।
  • scp: Secure File Copying।
  • sftp: Secure File Transfer Protocol।
  • ssh-keygen: SSH Key बनाने के लिए।
  • ssh-agent: Private Keys को Manage करने के लिए।

SSH का उदाहरण:

Client: ssh user@server.com
Server: Authenticates using public key
Connection Established ✅
Encrypted Session Begins 🔒

SSH के लाभ:

  • Remote Access बिना असुरक्षा के।
  • Encryption द्वारा गोपनीयता सुनिश्चित।
  • Passwordless Authentication संभव।
  • Automation और Scripted Access के लिए उपयुक्त।
  • Port Forwarding और VPN जैसे टनलिंग विकल्प।

SSH की सीमाएँ:

  • Key Mismanagement होने पर सुरक्षा खतरा।
  • Brute-force Attack के लिए पासवर्ड आधारित लॉगिन कमजोर।
  • Configuration में त्रुटि होने पर Unauthorized Access संभव।

वास्तविक उपयोग:

  • Linux/Unix Server Management
  • Cloud Platforms (AWS, Azure, Google Cloud)
  • Git और DevOps Tools
  • Network Administration
  • IoT Device Security

निष्कर्ष:

SSH एक अत्यंत शक्तिशाली और सुरक्षित नेटवर्क प्रोटोकॉल है जो आधुनिक आईटी इंफ्रास्ट्रक्चर की नींव है। यह दूरस्थ सर्वरों से सुरक्षित रूप से कनेक्ट होने, फाइलें ट्रांसफर करने और कमांड्स निष्पादित करने की सुविधा देता है। SSH के बिना नेटवर्क एडमिनिस्ट्रेशन और DevOps प्रबंधन की कल्पना असंभव है।

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