Agricultural Credit Review Committee क्या है और इसका उद्देश्य क्या है?
Agricultural Credit Review Committee क्या है और इसका उद्देश्य क्या है?
Agricultural Credit Review Committee क्या है और इसका उद्देश्य क्या है?
भारत में कृषि क्षेत्र को मजबूत बनाने और किसानों तक प्रभावी ऋण वितरण सुनिश्चित करने के लिए समय-समय पर विभिन्न समितियाँ (Committees) गठित की जाती रही हैं। इन्हीं में से एक है Agricultural Credit Review Committee, जिसे आमतौर पर Sivaraman Committee भी कहा जाता है।
📅 समिति का गठन
Agricultural Credit Review Committee का गठन 1986 में भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) द्वारा श्री ए. एम. शिवरामन (A.M. Sivaraman) की अध्यक्षता में किया गया था।
🎯 समिति का उद्देश्य
- कृषि क्षेत्र को दिए जा रहे ऋण की समीक्षा करना
- ऋण की उपलब्धता और वितरण में आने वाली समस्याओं की पहचान करना
- सहकारी और ग्रामीण बैंकिंग सिस्टम को प्रभावी बनाना
- Institutional Credit Structure में सुधार के सुझाव देना
- कृषकों तक समय पर और पर्याप्त ऋण पहुँचाना
🔍 प्रमुख सुझाव
- NABARD को कृषि ऋण का मुख्य नियामक बनाना
- Primary Agricultural Credit Societies (PACS) को सशक्त करना
- Short-term और Long-term Credit Institutions में तालमेल बढ़ाना
- कृषि में उन्नत तकनीक के लिए क्रेडिट सपोर्ट देना
📈 भारतीय कृषि क्षेत्र पर प्रभाव
- संगठित ऋण प्रणाली को मजबूती मिली
- NABARD की भूमिका और अधिक सशक्त हुई
- कृषकों तक Loan पहुँचने की प्रक्रिया सरल हुई
- Rural Credit Institutions में Structural Reforms हुए
🔚 निष्कर्ष
Agricultural Credit Review Committee भारतीय कृषि व्यवस्था में institutional credit की स्थिति सुधारने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित हुई। इसके सुझावों से NABARD, RRBs, और Cooperative Banks के माध्यम से किसानों को अधिक सुलभ और प्रभावी ऋण प्राप्त हो सका।
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